मंगलवार 3 नवंबर 2026 - 14:03
बच्चों का सम्मान करने के संबंध में आयतुल्लाह हाएरी शिराज़ी की तरबीयती नसीहत / अपने बच्चे को बादशाह समझें!

आयतुल्लाह हाएरी शीराज़ी ने कहा कि बच्चे को अमीर और अधिकार संपन्न समझने का अर्थ यह नहीं है कि उसे पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया जाए, बल्कि उसे मार्गदर्शन दिया जा सकता है, नसीहत की जा सकती है और आवश्यक निर्देश भी दिए जा सकते हैं। हालांकि, उससे बातचीत करने का अंदाज ऐसा होना चाहिए, जैसे किसी बड़े और सम्मानित व्यक्ति से बात की जा रही हो। इस दौरान उसकी इज्जत और गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह हाएरी शिराज़ी ने बच्चों की तरबीयत के संबंध में हदीस «الْوَلَدُ سَیِّدٌ سَبْعَ سِنِینَ» (बच्चा सात वर्षों तक सरदार होता है) की व्याख्या करते हुए कहा कि इस हदीस का अर्थ यह नहीं है कि सात साल की उम्र तक बच्चे पर किसी प्रकार की पाबंदी न लगाई जाए या उसे कोई निर्देश न दिया जाए। बल्कि इस दौरान भी बच्चे को जरूरी बातें समझाई जा सकती हैं और उसकी भलाई के लिए उसे नसीहत की जा सकती है, लेकिन ऐसा करते समय उसके सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

बच्चों का सम्मान करने के संबंध में आयतुल्लाह हाएरी शिराज़ी की तरबीयती नसीहत / अपने बच्चे को बादशाह समझें!

उन्होंने कहा कि सात साल की उम्र तक यदि आप बच्चे को कोई निर्देश या आदेश देना चाहते हैं, तो अवश्य दें, लेकिन आपका व्यवहार ऐसा होना चाहिए, मानो आप अपने से किसी बड़े व्यक्ति को कोई बात समझा रहे हों। उससे इस तरह बातचीत करें, जैसे किसी बादशाह या अधिकार संपन्न व्यक्ति से बात की जाती है।

आयतुल्लाह हाएरी शिराज़ी ने आगे कहा कि हदीस «الْوَلَدُ سَیِّدٌ سَبْعَ سِنِینَ» का हरगिज यह अर्थ नहीं है कि बच्चे को पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया जाए और उसे कुछ भी न कहा जाए। आप उसके प्रति अपनी शुभचिंता व्यक्त करें, उसे नसीहत दें और जरूरत पड़ने पर सचेत भी करें, लेकिन बातचीत का लहजा ऐसा रखें, जैसे आप किसी बड़े व्यक्ति से बात कर रहे हों। बच्चे को केवल एक छोटा बच्चा न समझें, बल्कि उसे बादशाह की तरह मानें और उसके सम्मान का पूरा ख्याल रखें।

स्रोत: पुस्तक «राहे रुश्द», जिल्द 2, पृष्ठ 26।

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